Vedic Astrology

सप्तमेश की पंचमस्थ होने की स्थिति

 

जब सप्तमेश पंचम भाव में हों तो यह एक अच्छी स्थिति है।  विचारक भी मोहित हो जाते हैं सप्तमेश की ऐसी स्थिति में और कुछ विचारणीय पहलू अछूता ही रह जाता है।  इसलिए उक्त भावेश की पंचम भाव में होने की स्थिति में उभरने वाली बिन्दुओं को निम्न रूप में सामने रख कर विचार करते हैं:


•    केंद्रेश त्रिकोण में स्थित हो कोण बल प्राप्त कर रहा है।

•    विवाह से जुड़े दो जरूरी भावों के बीच संबंध बन रहा है और विवाह योग कि उपलब्धता है।

•    संतान के भाव का भी संबंध हो रहा है।

•    सप्तम भाव व्यक्ति का लोगों के बीच छवि  का संबंध उसके पंचम भाव में निहित चुम्बकीय आकर्षण से जोड़ता है।

•    भावेश अपने से एकादश में स्थान पा रहे हैं। अतः पत्नी के लाभ भाव से जातक का प्रत्यक्ष/ परोक्ष लाभ है।

•    मारकेश (द्विस्वभाव लग्न की कुंडली में बाधकेश भी) का पंचम भाव से बनता है।

•    एक और बात है जिसका स्मरण किया जाना चाहिए की सप्तम भावेश शुभ ग्रह है या क्रूर।  कुछ लोग क्रूर ग्रह के स्वामित्व को शुभ मानते हैं क्योंकि केंद्रधिपति दोष में उनकी क्रूरता नष्ट हो जाती है।

•    चूंकि एकादश भाव फल वृद्धि करता है इसलिए जातक की विवाह की संख्या में भी वृद्धि या प्रणय प्रसंगो की बहुलता या विवाहोत्तर संबंध की स्थापना आदि बातों में भी वृद्धि करता है।

•    श्रेष्ठ संतान, पत्नी से लाभ, व्यापार से लाभ, शेयर आदि से आसान कमाई, विदेश प्रवास से उन्नति आदि की प्राप्ति इस स्थिति कि विशिष्ट अच्छी बातें है जो कि संभवतः पूर्वजन्म के शुभ कर्मों के परिणाम हों। •    परंतु मारकेश (कुछ में बाधकेश) और प्रतिद्वंदीयों / विरोधियों के ध्योतक के रूप में सप्तमेश की सप्तम से एकादश, जो कि उपचय भाव है, में स्थिति मृत्युतुल्य कष्टों में भी वृद्धि करता है। सप्तमेश कि इस स्थिति से उपजी ‘मारक’ समस्याएँ पूर्व के कर्मों से जुड़े होने कि स्थिति में भीषण है।  ये स्थिति तब और उग्र हो सकती है जब अन्य मारक भाव/भावेश, रंधरेश व अशुभ शनि से संबन्धित हो रहा हो। हालांकि यह भी देखना होगा कि शुभ और सौम्य ग्रहों का कैसा प्रभाव है या राशि/नक्षत्र गत सप्तमेश और उसका अन्य भाव/भावेश से संबंध या (सम्बद्ध) वर्ग कुंडली में सप्तमेश आदि की क्या स्थिति है।