Vedic Astrology

शत्रुता, विरोध, प्रतिवाद, भय आदि

व्यक्ति के जीवन में शत्रुता, विरोध, प्रतिवाद, भय आदि के कारण क्या हो सकते हैं, यह एक जिज्ञासा का विषय है। कौन आपके शत्रु हो सकते हैं, किसे आपको हानी हो सकती है, किस चीज से आपको खतरा है इसे लग्नवार प्रस्तुत किया गया हैं।

 

मेष: दुश्चरित्र स्त्री या कुसंगति मेष जातक के लिए शत्रुता और भय का कारण बनती है।

वृष: लेन-देन, धन-संपत्ति या धार्मिक बातें वृष जातक के लिए शत्रुता और भय का कारण बनती है।

मिथुन: चुगलखोर, विलासिनी स्त्री, चोर, साँप आदि शत्रुता और भय का कारण होता है।

कर्क: अस्त्र-शस्त्र, धार्मिक विषय, घोडा-हाथी/ वाहन आदि शत्रुता और भय का कारण । इन्दिरा गांधी की कुंडली इसका उदाहरण है।

सिंह: गृह भूमि, दूसरे की सहायता, मित्रता, धन-संपत्ति आदि शत्रुता और भय का कारण होता है। राजीव गांधी की कुंडली इसका उदाहरण है।

कन्या: शासक (boss, seniors), क्षेत्राधिकार का मुद्दा, नहर-नदी संबंधी विवाद के कारण शत्रुता और भय होता है। इस लग्न के मेरे एक मित्र हैं जो जल विभाग में उच्च पदस्थ हैं।  उन्हें बहुत दिनों तक अपने seniors का विरोध झेलना पड़ा।

तुला:  पराई सम्पदा, संतान, स्त्री आदि के कारण शत्रुता और भय मिलता है।

वृश्चिक: इनकी अकारण भी शत्रुता और भय का कारण हो सकती है।

धनु: अनुचित प्रेम प्रसंगो, स्त्रियॉं, बंधु-बंधवों से इन्हे शत्रुता और भय मिलता है।

मकर: व्यवसायी जन, स्त्रियॉं, कुसंगति इनकी शत्रुता और भय का कारण होता है।

कुम्भ: इस लग्न के व्यक्ति के शत्रु कम होते हैं जबकि मित्रता सूची बड़ी होती है। और जब कभी शत्रुता या भय की स्थिति आती है तो गुरुजन, ब्राह्मण, शाशक वर्ग, महाजन, मित्रा की सहायता से शत्रु से बाधा मुक्त हो जाता है।

मीन: अर्जित धन-संपत्ति, भाई-बंधु, पुत्री-स्त्री आदि के कारण शत्रु या भय की स्थिति आती है।